17 नवंबर 2014

मैं और वह

------------------कविता-श्रृंखला
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मैं चांद के बहुत करीब खड़ा था
जब उसने सितारों की भरी महफ़िल में खोल दिए 
अपने गेसुओं के सभी ख़म एकाएक
मैंने चांद से कहा: देखो तो, आसमान में कितनी दूर तक उड़ रहा है
तुम्हारे मन के सूरजमुखी का भीना-भीना पराग
तुम्हें कुछ ख़बर भी है
चांद ने मुझसे कहा : अहा, इसे तो ब्रेकिंग न्यूज़ होना चाहिए
चलो कोई न्यूज़ चैनल लगाओ
तुम भी, कहां डिस्कवरी चैनल पर रुके हुए हो..
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[दिलीप शाक्य ]

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