16 नवंबर 2014

ग़ज़ल

आसान ज़िन्दगी की मुश्किल कहानियां हैं
मुश्किल कहानियों में दिल के बयानियां हैं
रुख़ पे तुम्हारे जैसे जु़ल्फ़ों की जालियां हैं
खुशियां शज़र में दिल के यूं आनी-जानियां है
तीर-ए-नज़र से देखो क्या हाल दिल का होवे
आंखों ने आज उनकी, खेंची कमानियां हैं
तेरी हवा चले तो उमड़े ये दिल का दरिया
ख़ामोश पानियों में, ठहरी रवानियां हैं
लो फिर जुनूं के आगे पिछड़ी ये दुनियादारी
यादों में आंधियों सी, तेरी निशानियां हैं
तेरी सुबह की ख़ातिर तैय्यार हो रही हैं
मेरे शहर में जितनी, ये रातरानियां हैं
गुलज़ार शहर-ए-दिल है दोनों की मस्तियों से
थोड़ी मोहब्बतें हैं, थोड़ी जवानियां हैं
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[  दिलीप शाक्य ]

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